Wednesday, October 17, 2018

भगवान स्वामिनारायण # प्रस्तावना #

प्रस्तावना
भगवान स्वामिनारायण ३ अप्रैल १७८१ की सालमें हिंदुस्तानकी अयोध्या नगरीके पास छपइया गाँव में प्रगट हुए। मगर बादमें गुजरात आकर ज्यादातर उनके परम भक्त दादा खाचार के गढ़पुर के दरबार गढ़में रहे और १ जून १८३० की साल में ४९ वर्ष की उम्रमे गाँव गढ़पुर में ही अपनीं जीवन लीला समाप्त की।

गुजरात के कच्छ और काठियावाड के कई गाँवमें लीला -चरित्र अपने संत-हरीभक्तो के साथ किया, जिस की नोंध उनके संतगणने अपनी नोंदपोथी में लिखी हुयी है। इसी नोंध से कई पुस्तके और किताबे लिखी गई,मगर वो ज्यादातर 'गुजराती ' भाषा में है। इसिलिये ही बहेरिन स्थित सरदार जसबीर सिंहने बहरीन में गुजराती शिक्षक के पास ख़ास तौर पे गुजराती शिखी।


मगर हर कोई के लिए जसबीरजी की तरह गुजराती शिखना इतना आसान नहीं। यही नजर अंदाज़ करके मेरे हिंदी भाषी मित्र समुदाय के लिए ये ब्लॉग के माध्यम से कुछ चुने हुए लीला-चरित्र और साहित्य यहां पेश करने की में कोशिस कर रहा हुं ।

उम्मिद रखता हुं आप न केवल मेरा इस हिंदी ब्लॉगके माध्यम से श्री हरी के निज स्वरुप और लीला चरित्रकी जानकारी पाए; मगर दुसरे हिंदीभाषी लोग जो भगवान के ज्यादातर गुजरात - कठियावाड प्रदेश के अदभुत लिलाचरित्रो से वंचित है उन्हें भी विदित करने की कृपा करे, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग को मेरा इस अभ्यान से लाभ पहोंचे।

आपका सुजाव और टिपण्णी आवकार्य है, और मेरे लिये पथ प्रदर्शक बन शकता है इस लिए अवश्य लिखे।
                                

                  आपका भवदीय : यशवंत शाह, रेडमोंड, अमरीका

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