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Sunday, December 5, 2021

Friday, December 4, 2020

हिंदुत्व की मज़ाक ?????


हिंदुत्व की मज़ाक 





ये कैसा बदलाव ?




 

Tuesday, July 23, 2019

इन्हे आज़माकर अपनी राय बताइये + आयुर्वेदिक ज्ञान के दोहे + बिलकुल आसान इलाज


इन्हे आज़माकर अपनी राय बताइये 


 आयुर्वेदिक ज्ञान के दोहे 




बिलकुल आसान इलाज 




Friday, July 12, 2019

क्रेम्प से छुटकारा + बॉटल और आरओ का पानी +संध्या भोजन + घुटनेके इलाज = ४ वीडियो क्लिप्स



क्रेम्प से छुटकारा 


बॉटल और आरओ का पानी 



संध्या भोजन 




घुटनेके इलाज 



डॉक्टर मनोज योगाचार्य की 3 वीडियो क्लिप


अब मंदिर में और सत्संग सभा में आरती और महामंत्र धुन के समय 

पुरे जोश लगाके ताली बजाना मत भूले 






ढोलक ताली 





सुबह उठते ही ये क्रिया जरूर करे 


            

Wednesday, June 12, 2019

बर्फ के 10 फायदे

बर्फ के ये 10 फायदे जानकर चौंक जाएंगे आप


1-कड़वी दवाई खाने से पहले मुंह में बर्फ का टुकड़ा रख लें, दवाई कड़वी ही नहीं लगेगी।


2- यदि आपने बहुत ज्यादा खा लिया है और खाना पच नहीं रहा, तो थोड़ा-सा बर्फ का टुकड़ा खा ले। खाना शीघ्र पच जाएगा।


3- यदि आपके पास मेकअप का भी समय नहीं है या आपकी त्वचा ढीली पड़ती जा रही है तो एक बर्फ का छोटा-सा टुकड़ा लेकर उसे किसी कपड़े में (हो सके तो मखमल का) लपेट चेहरे पर लगाइए। इससे आपके चेहरे की त्वचा टाइट होगी और यह टुकड़ा आपकी त्वचा में ऐसा निखार ला देगा जो और कहीं नहीं मिलेगा।


4- प्लास्टिक में बर्फ का टुकड़ा लपेटकर सिर पर रखने से सिरदर्द में राहत मिलती है।


5- यदि आपको शरीर में कहीं पर भी चोट लग गई है और खून निकल रहा है तो उस जगह बर्फ मसलने से खून बहना बंद हो जाता है।


6- कांटा चुभने पर बर्फ लगाकर उस हिस्से को सुन्न कर ले, कांटा या फांस आसानी से निकल जाएगा और दर्द भी नहीं होगा।


7- अंदरुनी यानी गुम चोट लगने पर बर्फ लगाने से खून नहीं जमता व दर्द भी कम होता है।


8- नाक से खून आने पर बर्फ को कपड़े में लेकर नाक के ऊपर चारों और रखें, थोड़ी देर में खून निकलना बंद हो जाएगा।


9- धीरे-धीरे बर्फ का टुकड़ा चूसने से उल्टी बंद हो जाती है।


10- पैरों की एड़ियों में बहुत ज्यादा तीखा दर्द हो तो बर्फ की क्यूब मलने से आराम मिलेगा।


अच्छी बातें, अच्छे लोगों, अपने मित्र, रिश्तेदार और ग्रुप मे अवश्य शेयर करे.

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Saturday, September 29, 2018

होटल/रेस्टोरा का बिन आरोग्यपद खाना

डॉक्टर निरंजनभाई वर्मा 



पहले रसोई घर को बिगाड़ा, फिर शुरू हुआ बहार का होटल/रेस्टोरा का बिन आरोग्यपद खाना और बाद में सील सिला शरू हुआ फैक्टरी में बना  रेडी पैक खाना। 

याद आता है मुझे राज कपूर की एक बहुत पुरानी फिल्म का दृश्य। देहात से राज कपूर मुंबई आता है और लोकल ट्रेन में टिफिन डब्बेवाला को देख कर पूछता है। 

देहाती : अरे भाई ये इतने सारे टिफिन कहां ले जा रहे हो ? 

डिब्बे वाला : बाबू लोगो का टिफिन उनकी ऑफिस में पहोचाने हम    जा रहे है। 

देहाती :बाबू लोग घर से खाना खा के  दफ्तर क्यों नहीं जाते ?

डिब्बेवाला : क्योकि बाबुलोगो के पास इतना वक्त नहीं रहता। 

देहाती : अजीब है तुम्हारा ये मुंबई शहर। जिस रोटी कमाने के लिए आदमी दफ्तर जाता है वो रोटी खाने के लिए भी उसके पास समय नहीं है। 

आज हमारा यही हाल है। जिंदगी भर मेहनत और मज़दूरी करके इंसान पैसा कमाता है। फिर उसको उडाता है ब्रांडेड कपडे और फैशनेबल जुते, घड़िया, स्मार्ट फोन। मगर अपने शरीर के लिए अपना खाना खुद पकाने के लिए उसके पास समय नहीं है। और फिर भी अपने को अपने पूर्वजो से ज्यादा होशियार और बुद्धिवान होने के भ्र्म में जी रहे है।  










Wednesday, September 26, 2018

जनहित में जारि .....

                      सोना

सोना एक गर्म धातु है। सोने से बने पात्र में भोजन बनाने और करने से शरीर के आन्तरिक और बाहरी दोनों हिस्से कठोर, बलवान, ताकतवर और मजबूत बनते है और साथ साथ सोना आँखों की रौशनी बढ़ता है।

                        चाँदी

चाँदी एक ठंडी धातु है, जो शरीर को आंतरिक ठंडक पहुंचाती है। शरीर को शांत रखती है  इसके पात्र में भोजन बनाने और करने से दिमाग तेज होता है, आँखों स्वस्थ रहती है, आँखों की रौशनी बढती है और इसके अलावा पित्तदोष, कफ और वायुदोष को नियंत्रित रहता है।

                           कांसा

काँसे के बर्तन में खाना खाने से बुद्धि तेज होती है, रक्त में  शुद्धता आती है, रक्तपित शांत रहता है और भूख बढ़ाती है। लेकिन काँसे के बर्तन में खट्टी चीजे नहीं परोसनी चाहिए खट्टी चीजे इस धातु से क्रिया करके विषैली हो जाती है जो नुकसान देती है। कांसे के बर्तन में खाना बनाने से केवल ३ प्रतिशत ही पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         तांबा

तांबे के बर्तन में रखा पानी पीने से व्यक्ति रोग मुक्त बनता है, रक्त शुद्ध होता है, स्मरण-शक्ति अच्छी होती है, लीवर संबंधी समस्या दूर होती है, तांबे का पानी शरीर के विषैले तत्वों को खत्म कर देता है इसलिए इस पात्र में रखा पानी स्वास्थ्य के लिए उत्तम होता है. तांबे के बर्तन में दूध नहीं पीना चाहिए इससे शरीर को नुकसान होता है।

                        पीतल

पीतल के बर्तन में भोजन पकाने और करने से कृमि रोग, कफ और वायुदोष की बीमारी नहीं होती। पीतल के बर्तन में खाना बनाने से केवल ७ प्रतिशत पोषक तत्व नष्ट होते हैं।

                         लोहा

लोहे के बर्तन में बने भोजन खाने से  शरीर  की  शक्ति बढती है, लोहतत्व शरीर में जरूरी पोषक तत्वों को बढ़ता है। लोहा कई रोग को खत्म करता है, पांडू रोग मिटाता है, शरीर में सूजन और  पीलापन नहीं आने देता, कामला रोग को खत्म करता है, और पीलिया रोग को दूर रखता है. लेकिन लोहे के बर्तन में खाना नहीं खाना चाहिए क्योंकि इसमें खाना खाने से बुद्धि कम होती है और दिमाग का नाश होता है। लोहे के पात्र में दूध पीना अच्छा होता है।

                         स्टील

स्टील के बर्तन नुक्सान दायक नहीं होते क्योंकि ये ना ही गर्म से क्रिया करते है और ना ही अम्ल से. इसलिए नुक्सान नहीं होता है. इसमें खाना बनाने और खाने से शरीर को कोई फायदा नहीं पहुँचता तो नुक्सान भी  नहीं पहुँचता।

                      एलुमिनियम

एल्युमिनिय बोक्साईट का बना होता है। इसमें बने खाने से शरीर को सिर्फ नुक्सान ही होता है। यह आयरन और कैल्शियम को सोखता है इसलिए इससे बने पात्र का किसी भी रूप में उपयोग नहीं करना चाहिए। इससे हड्डियां कमजोर होती है. मानसिक बीमारियाँ होती है, लीवर और नर्वस सिस्टम को क्षति पहुंचती है। उसके साथ साथ किडनी फेल होना, टी बी, अस्थमा, दमा, बात रोग, शुगर जैसी गंभीर बीमारियाँ होती है। एलुमिनियम के प्रेशर कूकर से खाना बनाने से 87 प्रतिशत पोषक तत्व खत्म हो जाते हैं।

                           मिट्टी

मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने से ऐसे पोषक तत्व मिलते हैं, जो हर बीमारी को शरीर से दूर रखते हैं । इस बात को अब आधुनिक विज्ञान भी साबित कर चुका है कि मिट्टी के बर्तनों में खाना बनाने से शरीर के कई तरह के रोग ठीक होते हैं। आयुर्वेद के अनुसार, अगर भोजन को पौष्टिक और स्वादिष्ट बनाना है तो उसे धीरे-धीरे ही पकना चाहिए। भले ही मिट्टी के बर्तनों में खाना बनने में वक़्त थोड़ा ज्यादा लगता है, लेकिन इससे सेहत को पूरा लाभ मिलता है। दूध और दूध से बने उत्पादों के लिए सबसे उपयुक्त हैं मिट्टी के बर्तन। मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से पूरे १०० प्रतिशत पोषक तत्व मिलते हैं। और यदि मिट्टी के बर्तन में खाना खाया जाए तो उसका अलग से स्वाद भी आता है।

कृपया जनहित में जरूर शेयर करें-                                                  भारतीय योग विद्या महासमिति चंडीगढ़ 🙏🏻